पटना ब्यूरो: बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर शुरू हुई बहस सोमवार को तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई। दरभंगा में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई जघन्य घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जिसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच माहौल लगातार गरमाता चला गया।
कार्यवाही की शुरुआत होते ही राष्ट्रीय जनता दल के सदस्यों ने राज्य में अपराध की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। आरजेडी एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने दरभंगा की घटना का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा। इसी क्रम में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सीट से खड़े हुए और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मौजूदा सरकार के कार्यों को गिनाया और कहा कि राज्य ने बीते वर्षों में कई क्षेत्रों में प्रगति की है। मुख्यमंत्री के इस बयान के दौरान सदन में शोर-शराबा तेज हो गया।
इसी बीच विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी बात रख रहे थे, तब उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया। इससे नाराज विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण प्रश्नकाल नहीं चल पाया और परिषद की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी सदन का माहौल शांत नहीं हो सका। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर बहस तेज हो गई। इसी दौरान भाजपा के एक सदस्य की टिप्पणी से नाराज होकर राबड़ी देवी अपनी सीट से उठकर आगे बढ़ीं, हालांकि अन्य सदस्यों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद पूरा विपक्ष वेल में आ गया, जिससे सदन की कार्यवाही एक बार फिर बाधित हुई।
घटना के बाद राबड़ी देवी ने सभापति को पत्र लिखकर भाजपा सदस्य द्वारा की गई टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के दौरान इस तरह की भाषा सदन की गरिमा के खिलाफ है।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। राजद नेताओं ने मुख्यमंत्री की भाषा और रवैये पर सवाल उठाए, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में रहा, जहां सत्ता और विपक्ष दोनों के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।





