संवाददाता, रांची: झारखंड सरकार ने शराब नीति को लेकर बड़ा गेम प्लान तैयार किया है। राज्य में अंग्रेजी शराब अब पहले से सस्ती हो सकती है क्योंकि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने शराब पर वैट को घटाकर सिर्फ 5 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। इस प्रस्ताव को वित्त विभाग की हरी झंडी मिल चुकी है, और अब यह प्रस्ताव वाणिज्य कर विभाग के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा गया है।
यह कदम न केवल शराब प्रेमियों के लिए राहत भरा है, बल्कि सरकार की राजस्व बढ़ाने की कड़ी रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
क्या सस्ती शराब से भरेंगे राज्य के खजाने?
विभागीय सूत्रों की मानें तो शराब पर टैक्स घटाने के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है — बेहतर बिक्री, बढ़ता राजस्व और अवैध तस्करी पर अंकुश। विशेषज्ञों का मानना है कि VAT कम होने से राज्य की शराब बिक्री में बड़ा उछाल आ सकता है, जिससे राजस्व में करोड़ों की बढ़ोतरी संभावित है।
पड़ोसी राज्यों से मुकाबला या चुनावी तैयारी?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फैसला न सिर्फ आर्थिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां शराब नीति सख्त है, वहीं झारखंड इस अवसर को भुनाने की तैयारी में है।
वहीं, विपक्ष इस प्रस्ताव को ‘जनविरोधी और सामाजिक नुकसानदेह’ करार दे सकता है। लेकिन सरकार इसे ‘राजस्व सशक्तिकरण और तस्करी रोकथाम’ का नाम दे रही है।
अब आगे क्या?
जानकारों की मानें तो वाणिज्य कर विभाग से मंजूरी मिलते ही नया रेट पूरे राज्य में लागू हो जाएगा। ऐसे में 2025 की शुरुआत से झारखंड में विदेशी ब्रांड की शराब सस्ती दर पर उपलब्ध हो सकती है।





