संवाददाता, धनबाद: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार लेबर कोड के विरोध में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर बुधवार को कोयलांचल क्षेत्र में देखा गया। बीसीसीएल और ईसीएल की कई कोल परियोजनाओं में कोयला उत्पादन और डिस्पैच पूरी तरह से बाधित रहा, जिससे कंपनी को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई है।
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) को छोड़कर सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने इस हड़ताल में भाग लिया। सुबह से ही यूनियन समर्थक विभिन्न खनन क्षेत्रों में सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया। उन्होंने निरसा, कतरास, बाघमारा और झरिया समेत कई क्षेत्रों में ओबी साइट, कोल परियोजनाएं और डिस्पैच केंद्रों पर जाकर कामकाज रुकवाया और श्रमिकों से समर्थन की अपील की।
हड़ताल के चलते रेलवे साइडिंग्स पर भी ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह से ठप रहा। यूनियन नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित लेबर कोड श्रमिक विरोधी हैं और इससे मजदूरों के अधिकारों में कटौती होगी। उनका आरोप है कि सरकार निजीकरण को बढ़ावा देकर श्रम कानूनों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।





