Hazaribag: हजारीबाग की खूबसूरत झील सोमवार को उस वक्त मातम का मंजर बन गई, जब एक युवक की नाव पलटने से मौत हो गई। मृतक की पहचान आलेख गौरव के रूप में हुई है, जो शहर में स्टेशनरी की दुकान चलाता था। हादसे की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
झील के बीचोबीच पलटी नाव, मौत निगल गई जिंदगी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गौरव अकेले ही झील में नाव लेकर घूम रहा था। नाव जैसे ही झील के गहराई वाले हिस्से में पहुंची, वह असंतुलित होकर पलट गई। गौरव ने बचने की कोशिश की, लेकिन वह पानी में समा गया। स्थानीय गोताखोरों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन वे नाकाम रहे।
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप, NDRF को स्थाई तौर पर तैनात करने की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही सदर सीओ मयंक भूषण मौके पर पहुंचे और NDRF की टीम को बुलाया गया। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हजारीबाग जैसे जिले में, जहां झील जैसे जोखिम वाले स्थल हैं, वहां स्थायी रेस्क्यू यूनिट का न होना एक गंभीर प्रशासनिक चूक नहीं है?
स्थानीय नागरिकों ने गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि झील में तैनात मोटरबोट लंबे समय से खराब है, और बचाव के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी। लोगों ने झील की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्थायी NDRF यूनिट की मांग की है।
क्या हजारीबाग प्रशासन नींद से जागेगा?
हर साल हजारीबाग झील हजारों पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बदहाल है। न लाइफ जैकेट्स की व्यवस्था, न ही प्रशिक्षित रेस्क्यू स्टाफ — यह लापरवाही आज एक परिवार के लिए ज़िंदगी भर का ग़म बन गई।
प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि हजारीबाग की शांति में झील बनी रहे, या वह लापरवाही का आईना बनकर हर साल किसी न किसी घर की रौशनी छीनती रहे।





